अध्याय 201 - लुप्त होती

मार्गॉट का नज़रिया

मैंने सब कुछ होते हुए ठीक सामने, उसी पल में देखा।

वो बदलाव।

वो टूटन।

एक सेकंड पहले वो मेरे बगल में बैठा था, तन हुआ हुआ लेकिन काबू में… और अगले ही पल…

वो खड़ा था।

सारा खुद‑पर‑काबू गायब।

ये ऐसा था जैसे बिना किसी चेतावनी के कोई तूफान उमड़ता दिखे, उसका पूरा शरीर गुस्से में कसता...

लॉगिन करें और पढ़ना जारी रखें